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Lord Ram

Lord Ram

श्री राम जी

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ॐ श्रीरामाय नमः॥ ॐ रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे। रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥ श्री राम जी को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, यानी वह आदर्श व्यक्ति जो हर परिस्थिति में धर्म, सत्य, और मर्यादा का पालन करता है। वे भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं, और उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि सही रास्ता चुनना हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन वही रास्ता हमें भीतर से मजबूत बनाता है। श्री राम जी का सबसे बड़ा संदेश है धर्म के साथ खड़े रहना। धर्म का अर्थ केवल पूजा नहीं है, बल्कि अपना कर्तव्य निभाना, सच बोलना, रिश्तों में सम्मान रखना, और जरूरत पड़ने पर त्याग करना भी है। राम जी ने अपने जीवन में कई कठिन फैसले लिए, लेकिन हर बार उन्होंने स्वार्थ के बजाय धर्म और जिम्मेदारी को चुना। इसलिए वे केवल एक भगवान नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सीख भी हैं। रामायण में श्री राम जी का धैर्य, संयम, और नेतृत्व बहुत स्पष्ट दिखाई देता है। वे एक अच्छे पुत्र, एक अच्छे भाई, एक अच्छे पति, और एक अच्छे राजा के रूप में जाने जाते हैं। उनका चरित्र हमें यह याद दिलाता है कि सच्ची महानता दिखावे में नहीं होती, बल्कि व्यवहार, विनम्रता, और सही निर्णय में होती है। उनके जीवन में संघर्ष भी था, वनवास भी था, और युद्ध भी था, लेकिन उन्होंने कभी अपने मूल्यों को नहीं छोड़ा। श्री राम जी की भक्ति हमें मन की स्थिरता देती है। जब हम उन्हें याद करते हैं, तो हमें अपने डर, गुस्से, और उलझन को संभालने की प्रेरणा मिलती है। राम जी का नाम हमें यह विश्वास दिलाता है कि सत्य और धर्म का साथ देने वाला व्यक्ति अकेला नहीं होता। ईश्वर की कृपा और सही दिशा उसके साथ रहती है।

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्। नव कंज लोचन, कंज मुख, करकंज पद कंजारुणम्॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...॥ कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्। पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि, नौमि जनक सुतावरम्॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...॥ भजु दीनबंधु दिनेशदानव, दैत्य वंश निकन्दनम्। रघुनन्द आनन्द कन्द कौशलचन्द्र, दशरथ नन्दनम्॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...॥ सिर मुकुट कुंडल तिलक, चारु उदारु अंग विभूषणम्। आजानुभुज शर चाप-धर, संग्राम जित खरदूषणम्॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...॥ इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि मन रंजनम्। मम ह्रदय कंज निवास कुरु, कामादि खल दल गंजनम्॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...॥ मन जाहि राचेऊ मिलहि, सो वर सहज सुन्दर सांवरो। करुणा निधान सुजान, शील सनेह जानत रावरो॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...॥ एहि भांति गौरी असीस, सुन सिय हित हिय हरषित अली। तुलसी भवानिहि पूजी, पुनि-पुनि मुदित मन मन्दिर चली॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...॥